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महाराष्ट्र में कांग्रेस की हार: क्या राहुल गांधी की खतरनाक राजनीति है इसकी वजह?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने मात्र 19 सीटों पर ही जीत हासिल कर पायी हैं. कांग्रेस ने 288 में से 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था. कांग्रेस के जीत का स्ट्राइक रेट 18.8 प्रतिशत है, वही भाजपा का स्ट्राइक रेट 88.5 प्रतिशत है. कांग्रेस से करीबन 5 गुना अधिक. भाजपा ने 288 में से 149 सीटों पर चुनाव लड़कर 132 सीटों पर जीत हासिल की है. 

Maharashtra Assembly Election 2024 Result : Rahul Gandhi


Maharashtra Assembly Election 2024 Result :  महाराष्ट्र  विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह से पिट गई. इस चुन्नाव में कांग्रेस (INC ) को जो पटकनी मिली है इसका कारण राहुल गाँधी की वर्तमान राजनीति हैं. आख़िरकर इंडिया गठबंधन को महारष्ट्र में क्यों हराया गया, क्योकि राहुल गांधी जो राजनीति अभी कर रहे हैं, वो बेहद ही खरतनाक राजीनीति हैं. 
SC/ ST या फिर ओबीसी की दी जाने वाली आरक्षण से इस स्वर्ण समाज को कोइ फर्क नहीं पड़ता. सवर्णों को पता है कि इतना तो उन्हें देना ही पड़ेगा, नहीं तो लोग विद्रोह कर देंगे. इस जातिगत आरक्षण के रहते हुए भी सवर्णों का दबदबा सरकार से लेकर नौकरशाही तक बना हुआ हैं. दिक्कत इन्हें तब होती है जब राहुल गांधी 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा को तोड़ने की बात करते हैं. 
सवर्णों को दिक्कत जातिगत आरक्षण से नहीं बल्कि जातिगत जनगणना से है. उन्हें पता है कि यह हो जाने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी. ये लोग विद्रोह कर देंगे. 50 प्रतिशत वाली सीमा ख़त्म हो जायेगी. 

RJD, सपा या फिर जेडीयू जैसे क्षेत्रीय दल जो वर्षों से सामाजिक न्याय की राजनीति  करते आ रहे है, उनसे भी इन सवर्णों को बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. इन क्षेत्रियों दलों की पकड़ राष्ट्रीय राजनीति में  फिलहाल उतनी नहीं हैं, जो इस मुद्दें को ज्वलित रख सके. सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाले ऐसे कई क्षेत्रियों दलों में सवर्णों की मज़बूत पकड़ भी हैं. 

इन्हें फर्क पड़ता है जब कांग्रेस जैसी ग्रैंड ओल्ड पार्टी सामाजिक न्याय की बात करने लगता हैं. जब राहुक गाँधी जातिवार जनगणना की बात करते हैं. राहुल गाँधी आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म करने की बात करते हैं. 
राहुल गांधी की इस बात ने सिस्टम में बैठे सवर्णों को डरा दिया है और लोकसभा 2024 का परिणाम के बाद इस सिस्टम में बैठे सवर्णों की नींद ही उड़ गयी हैं. राहुल गांधी की इस तरह की बातों ने सवर्णों को यूनाइट कर दिया है. सवर्णों को सही में समझ में आ गया है कि 'एक है तो सेफ है.' 

सिस्टम में बैठे सवर्णों का चाहे वह न्यायिक सिस्टम में हो या फिर चुनावी सिस्टम में, एक ही मिशन हैं, राष्ट्रिय राजनीति से सामाजिक न्याय  को बाहर कर देना जो राहुल गांधी आजकल कर रहे हैं. 


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