Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

Responsive Advertisement

भरात का मिज़ाज ये तो नहीं था !

नमस्कार,
काफी दिनों बाद आज लिख रहा हूँ। थोड़ी व्यस्तता थी, तो लिख नहीं पा रहा था।
आज मैं कुछ महत्वपूर्ण बातें, जो सोशल मीडिया पर घटित हो रही हैं, उसी को लेकर अपना मिज़ाज रख रहा हूँ।

आज मैं विशेष रूप से उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ, जो खुद को सच्चा हिन्दू कहते हैं। ऐसे लोग हिन्दू धर्म के नाम पर सबसे बड़ा कलंक हैं। हिन्दुत्व की 'ह' का भी उन्हें ज्ञान नहीं है। बस उनके अंदर कट्टरता ने अपनी जगह बना ली है, जबकि उन्हें यह भी नहीं पता कि हिन्दू धर्म में कट्टरता का कोई स्थान नहीं है। यह शब्द हिन्दू धर्म के लिए बना ही नहीं है, जो इस धर्म की सबसे बड़ी खूबसूरती है।

और एक बात यह भी मजेदार है कि ये तथाकथित सच्चे हिंदूवादी खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी मानते हैं और साथ ही दूसरों के राष्ट्रवादी होने का प्रमाणपत्र भी बांटते हैं। ये खुद को देश का सच्चा बिल्डिंग ब्लॉक भी बताते हैं और फेक न्यूज़ के आधार पर अपनी बिना मूल्य वाला तर्क रखते हैं, जिसका कोई सिर नहीं है और ना ही कोई पैर।
ये बेरोज़गार होते हुए भी बेरोज़गार नहीं हैं। इनके पास एक काम है और वह है, बस एक बार आप पीएम या RSS की आलोचना करके देखिए, आपको पता चल जाएगा। ये आप पर गैंगवार कर देंगे। पूरा का पूरा समूह गालियों की बौछार करने लगेंगे, मानो ऐसा लगता है कि पीएम इनके पुरखों की जागीर है, जिस पर इनका पुस्तैनी हक है। हमारा तो पीएम है ही नहीं, क्योंकि हम जो इनसे राष्ट्रवादी का प्रमाणपत्र नहीं लेते रहते हैं।
खैर, ये सब तो आप भी जानते हैं। दरअसल, मैं यह बताना चाहता था कि जैसे कि आप जानते ही हैं कि दो दिन पहले ही एक कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या गोली मारकर कर दी गई। इस पर मैंने अपना विचार फेसबुक पर रखा। फिर क्या था, वो तथाकथित राष्ट्रवादी मुझ पर अटैक करना शुरू कर दिए। तरह-तरह के फोटोशॉप वाले कट-पिस्ट पोस्ट करके इस हत्या को सही साबित करने में जुट गए और मुझे देशविरोधी तत्व साबित करने में। एक ने तो यहाँ तक कह दिया कि गौरी ने बबूल का पेड़ बोई थी तो काटा चुभेगा ही। कुतिया कहने पर इतना बवाल क्यों मच रहा है?
मतलब SIT के पहले ही ये लोग जान गए कि इसका हत्या का कारण क्या था और हत्या करने वाला कौन है। अब समझ रहे हैं कि ये जान गए हैं कि "हत्या करने वाला कौन है", तभी न इतना एक्टिव होकर इस हत्या को सही साबित करने में लगे हैं।
अपना देश का मिज़ाज तो ऐसा नहीं था जो आज ये लोग दिखा रहे हैं। हम तो किसी और मिज़ाज में पले-बढ़े थे।
ऐसे गौरी लंकेश के बारे में मैं भी नहीं जानता था। ऐसे हम साउथ को जानते कहाँ हैं! पर उनके हत्या के बाद उनके बारे में पढ़ा। उनका आखिरी कॉलम, जिसे रविश जी ने हिंदी में अपने ब्लॉग 'कस्बा' में डाला था, उसे भी पढ़ा। वो गलत लिखती थीं या सही, यह मुझे नहीं पता। पर वह बेबाक लिखती थीं, निडर होकर। यही तो, जहाँ तक मैं समझता हूँ, पत्रकारिता की खूबसूरती है।

गौरी का विचारधारा जो भी हो, वामपंथी हो या दक्षिणपंथी, हम उनके बातों से असहमति जता सकते हैं, पर इस बात के लिए हत्या कर देना और उस पर से इसे सही ठहराने की कोशिश करना!! यह कहाँ तक सही है?
अपना देश का मिज़ाज ऐसा नहीं था।
गौरी हिन्दू विरोधी थी, फौजियों के शहादत पर जश्न मनाती थी, अकर्म थी, बकरम थी। मतलब जो हत्या हुआ, वह सही है? उसका हत्या होना कोई गलत बात नहीं है? यह तो देशभक्तों का काम है, जैसे नाथूराम के समर्थक नाथूराम को देशभक्त मानते हैं। यह तो गौरी को RSS का हत्यारा तक बता दिया।

इतना बीमार कोई कैसे हो सकता है? आखिर कैसे???
बस यही दुआ करूंगा कि ये लोग जल्द से ठीक हो जाएं।
गेट वेल सून!!!

Post a Comment

0 Comments