"हज़ारों ज़बाबों से अच्छी हैं मेरी खामोशी
न जाने कितनी सवालों की आबरू रख ली |"
ऐसे ये शेर अयाज़ झांसवी का मॉडिफाइड वर्शन है , जिसे किसने मॉडिफाइड किया है वो आप जानते ही हैं और यह शेर देखते ही आप समझ भी गए होगे, आज हम किसके बारे में बात करने वाले हैं |
आज बात करेंगे एक ऐसे ब्यक्ति का जो सिर्फ अपने पढ़ाई के बलबूते पे एक गरीब परिवार से देश का सबसे बड़ा पद पीएम तक पहुचा | आज बात करेंगे एक ऐसे ब्यक्ति का जिसने देश में लाईसेंसी राज़ ख़त्म कर एक उदारवादी अर्थव्यवथा दी | आज बात करंगे ऐसे ब्यक्ति का जिसे जब देश हित के लिए बलि का बकरा बनया गया, बिना कुछ बोले वो अपना बलि चढाने को तैयार हो गए | आज बात करेंगे ऐसे ब्यक्ति का जो सबसे ज़्यादा शिक्षित होते हुए भी उन्हें पोपट कहाँ गया | आज बात करेंगे देश के पहले माइनॉरिटी समुदाएँ से आने वाले पीएम की, पहले सिख पीएम की | सरदार मनमोहन सिंह का |
आज उनका बर्थडे हैं | तो सबसे पहले उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवंम शुबकामनाएं | आपकी उम्र और लम्बी हो |
सरदार मनमोहन सिंह जी का जन्म पंजाब के गह गाँव में, जो अभी पाकिस्तान का हिसा हैं , २६ सितम्बर १९३२ को हुआ था |घर में बिजली नहीं थी तो किरोसन में पढ़कर आँखें खराब कर ली पर पढ़ाई नहीं छोड़े और स्कालरशिप के बलबूते ऑक्सफ़ोर्ड तक पहुँच गए और इकोनॉमिक्स में पीएचडी कर लिए |यूएन तक भी पहुच गए पर दिल्ली स्कूलऑफ़ इकोनॉमिक्स में पढ़ाने के लिएयूएन से इस्तीफा दे दियें |
जब देश का सारा सोना गिरवी पड़ा हुआ था | देश की आर्थिक व्यवथा पूरी तरह से चरमराकर अर्थी पर लेती हुई थी | जब देश का पूरा विदेशी जमा पूजी मात्र एक बिलियन यूएस डॉलर था और देश का क़र्ज़ चुकाने के लिए भारत की IMF के आगे सिर झुकना परा था, तब उन्होंने राजनीतिक में नहीं, राजनीतिक व्यवस्था में एंट्री लिए | पीवी नरसिम्हा राव ने उन्हें वितमंत्री बनया | तब उन्होंने उदारवादी अर्थनीति लागू करने का प्रस्ताव दिए तो उन्हें ये बोलकर मंजूरी दिया गया कि अगर यह व्यवस्था सफल हुई तो पूरा क्रेडिट सरकार को जायेगी और असफल हुआ तो सिर्फ और सिर्फ मनमोहन जी को | उन्होंने इस जिस का बिना कोई परवाह किये हाँ कर दिए और उसका रिज़ल्ट आज हमलोगों के सामने है | जिसकी वज़ह से आज ख़ुद पे हम चीन के बाद सबसे तेज़ विकसित हुई अर्थव्यवथा बोलते हुए गर्व करते हैं |
जब देश दंगों के हालात से उबार रहा था | जब देश का जीडीप गर्त में था | राजनीतिक भूचाल मचा हुआ था तब उन्हें देश हित के लिए एक बार फ़िर से बलि का बकरा बनाया गया और वो बिना कुछ बोले इसके लिए तैयार हो गएँ और दस सालों तक भारत का पीएम रहें जो नेहरु के बाद सबसे लंबा कार्यकाल था |
ऐसे सच में इतिहास उनके ख़ुद के शब्दों में उनके साथ थोड़ा नरमी बरता है और बरतेगा भी पर उन्होंने दस साल में बहुत महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए | हाँ, ये भी सच है कि उनकी दूसरी पारी घोटालों से पूर्ण पारी रहा पर उनके योगदान को भारत भील नहीं सकता | उन्होंने RTI दिया जो देश की जनता का सबसे बड़ा हथियार बना | मनेरगा दिया | फ़ूड सिक्यूरिटी बिल दिया | किसान का ८० हज़ार करोड़ का क़र्ज़ माफ़ कियें | जीडीपी दर को 9 प्रतिशत तक ले गएँ \
उनके समय IIP [इंडस्ट्री इंडेक्स ऑफ़ प्रोडक्शन ] 11% रही जो मौजूदा २०१७ में -8% हो गयी हैं |
उन्होंने जीडीपी को 9% तक ले गए थे और जाते- जाते 7.7% तक छोड़ गए थे जिसे मौजूदा सरकार ने 5% पे लाकर छोड़ दी हैं | नोत्बंदी को लेकर उनका अनुमान भी एकदम करेक्ट रहा | नोटबंदी के कारण 2% जीडीपी में गिरावट आई |
उनके समय पेट्रोल पर30 से ३२% तक ही टैक्स था जो अब ५८% तक हो गयी हैं | जीएसटी का मैक्सिमम रेट उन्होंने 18% रखने का सुझाव दिया था पर मौजूदा सरकार ने २८% कर दिया|
उनके समय नौकरी प्रति वर्ष 9 लाख क्रिएट हुयी और अभी 1.5 लाख हो रही हैं |
उनके रहते हुए उतने उतने सैनिक नहीं मरे जितने आज मर रहे है | २०००७ में सिर्फ 12 सैनकों ने अपनी जान गावई थी जिसे भारत के इतिहास का पीसफुल इयर भी कहते हैं |
ऐसे बहोत सारी चीज़े है जो वो बिना कुछ बोले देश हित में कर गए | हम उनके इस हित को नमन करते हैं |

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