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बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल का संविधान से 'सेक्युलर' शब्द हटाने का सुझाव

बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज़्ज़मां ने हाल ही में देश के संविधान से 'सेक्युलर' और 'समाजवाद' जैसे शब्दों को हटाने का सुझाव दिया। यह सुझाव बुधवार को हाई कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें 2011 में किए गए 15वें संशोधन को चुनौती दी गई थी। इस संशोधन के जरिए बांग्लादेश के संविधान में 'सेक्युलरिज़्म' को फिर से जोड़ा गया था, जो देश को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में परिभाषित करता है।

 


समाचार एजेंसी पीटीआई के खबर अनुसार असदुज़्ज़मां ने यह भी सुझाव दिया कि बांग्लादेश के स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व प्रधानमंत्री मुजीब उर रहमान को 'राष्ट्रपिता' के दर्जे से हटाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में सांप्रदायिकता और धार्मिक पहचान पर चर्चा तेज हो रही है। धर्मनिरपेक्षता शब्द को हटाने का तर्क यह दिया गया है कि यह बांग्लादेश के पारंपरिक मूल्यों के अनुकूल नहीं है और इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

असदुज़्ज़मां के इस सुझाव ने बांग्लादेश के सामाजिक और राजनीतिक हलकों में गंभीर चर्चाओं को जन्म दिया है, जहां कई लोगों का मानना है कि यह देश के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। 

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