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कश्मीर : धर्म परिवर्तन से अपने बेटियों को कैसे बचाए - कश्मीरी सिख सुमदाय के लिए एक बड़ी समस्या

 भवनीत कौर जिसने इस्लाम धर्म को हाल में ही अपना लिया | अब उसका नाम कुरत उल फ़ातिमा है | इसका एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमे वो कहते हुए नज़र आ रही है - " सिख धर्म लगभग 300 साल पहले आया था, लेकिन उससे पहले धर्म क्या था ? मैं यह जानने के लिए उत्सुक थी और इस तरह मैं इस्लाम के करीब आई | मैंने साथ साल से अधिक रिसर्च करने के बाद अपना धर्म परिवर्तन कर लिया | मैं यह वीडियों इसलिए रिकॉर्डिंग कर रही हूँ ताकि मेरे माता - पित्ता और समुदाय के सदस्यों को पता चले कि मैं अपने मूल धर्म में वापस आ गयी हूँ |"

sikh Guru Gurunanak ji
 

श्रीनगर : Kashmir में  सिख समुदाय के धर्म परिवर्तन का मुद्दा हाल के वर्षों में काफी तेज़ी पकड़ रहा हैं जो यहाँ के डेमोग्राफी के लिए के खतरे की घंटी हैं |  इसे लेकर सिख समुदाय और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों में चिंताओं का माहौल देखा जा रहा हैं ।

  कश्मीरी सिखों के लिए अपने बेटियों को धर्म परिवर्तन से  रोकना एक बहुत बड़ी समस्या बन गयी हैं | उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि  वे क्या करें |

 दि  प्रिंट के रिपोर्ट के अनुसार गुरदीप कौर जो एक 52 - वर्षीय सिख धार्मिक नेता हैं वो हर शुक्रवार को गुरुद्वारें में एक महत्वपूर्ण सभा के नेतृत्व कर रही थी | इस सभा का विषय था - अपनी सिख बेटियों को इस्लाम के हाथों खोने से कैसे रोके | यह विषय जल्द ही एक परवरिश के विषय में बदल गया  | वो कहती हैं - 

" हमें अपनी बेटियों को धर्म का ज्ञान देने की ज़रूरत हैं | हमें उन्हें गुरुबानी सिखानी होगी | अगर आपकी बेटी पाठ नहीं करती हैं, तो आप एक माँ के रूप में विफल हैं | " 

कश्मीर में सिखों का खुद को बचाने का आस्तित्व की लड़ाई में एक बहुत बड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा हैं | कश्मीर में मात्र चालीस हज़ार लोग रहते हैं जो कश्मीर की आबादी का करीबन 1  प्रतिशत ही हैं | धर्म परिवर्तन की संख्या देखने को कम मिली हैं पर डर बहुत बड़ा हैं | ये जो मुट्ठी भर गिने चुने जिसे ' लव जिहाद' का तो नाम नहीं दिया जा सकता हैं पर चिंता का विषय ज़रूर हैं | यह कश्मीरी सिखों के धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में उथल -पुथल मचा दिया हैं | 

दि प्रिंट के खबर के अनुसार असमा, एक सिख महिला जिसने शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन किया, कहती है -

 "अगर उन्हें (मेरे माता - पित्ता को ) पता चल गया  तो  वह हमें मार देंगे | मैं अक्सर सोचती हूँ कि दिल्ली  हमारे जैसे अंतर्धार्मिक जोड़ों के लिए बेहतर हैं | वहां आजादी है और कोई भी परेशान नहीं करता |"  

असमा कश्मीर से दिल्ली जाना चाहती है |

इस तरह के धार्मिक परिवर्तन का विडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जाति हैं | इसका जश्न मनाया जाता हैं | २ सितम्बर को, जब श्रीनगर के एक 28 वर्षीय युवा अंगद ने अपना फेसबुक  पेज खोला तो, एक विडियो मिला, जिसका टाइटल था - " अल्लहा हू अकबर, इस सिख लड़की ने इलाम स्वीकार कर लिया |" 

कश्मीर, जिसे "धरती का स्वर्ग" कहा जाता है, सदियों से विविध धर्मों, संस्कृतियों और जातियों का संगम स्थल रहा है। हिंदू धर्म, इस्लाम, बौद्ध धर्म और सिख धर्म का यहां व्यापक प्रभाव रहा है। 1947 के विभाजन और उसके बाद के कश्मीर विवाद ने इस क्षेत्र की धार्मिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव लाए। यह क्षेत्र एक बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक समाज का प्रतीक है, लेकिन समय-समय पर यहाँ विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच तनाव भी देखा गया है।

सिख समुदाय की प्रतिक्रिया

सिख समुदाय ने कई बार धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर आवाज उठाई है। 2021 में जम्मू और कश्मीर में धर्म परिवर्तन की घटनाओं के बाद सिख समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए और राज्य तथा केंद्र सरकार से इस मामले में कार्रवाई की मांग की। सिख समुदाय का कहना है कि यह उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और अन्य सिख संगठनों ने भी इन घटनाओं की निंदा की है और सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

संवैधानिक पहलू और धार्मिक स्वतंत्रता

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म को मानने और प्रचार-प्रसार करने का अधिकार देता है। साथ ही, अनुच्छेद 26 और 28 धार्मिक समुदायों को अपनी धार्मिक गतिविधियों को स्वतंत्रता से संचालित करने का अधिकार प्रदान करते हैं। लेकिन, भारत में जबरन धर्म परिवर्तन या बलपूर्वक धर्मांतरण कानूनन जुर्म है, और कई राज्यों में इसे रोकने के लिए कानून भी बनाए गए हैं।

कश्मीर प्रशासन और केंद्र सरकार का रुख

केंद्र सरकार ने भी समय-समय पर अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं। सरकार ने उन मामलों की जांच की प्रक्रिया को तेज किया है जिनमें धर्म परिवर्तन की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी इस तरह के मामलों को गंभीरता से ले रही हैं और दोषियों पर कार्रवाई कर रही हैं।

कश्मीर में सिख समुदाय के धर्म परिवर्तन का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। यह विषय न केवल धार्मिक स्वतंत्रता का है, बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कारक भी जुड़ते हैं। सिख समुदाय की मांग है कि उनके धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा की जाए और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों को तुरंत रोका जाए। सरकार को चाहिए कि वह इस विषय पर उचित कार्रवाई करे और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।


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