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धारा 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में भाजपा का प्रदर्शन: उम्मीदों के विरुद्ध हकीकत ?

जम्मू-कश्मीर में 2024 के विधानसभा चुनावों के परिणाम भाजपा के लिए उम्मीद से कमतर रहे, खासकर धारा 370 हटाए जाने के बाद। भाजपा ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की, जो पार्टी के इतिहास में अब तक की सर्वश्रेष्ठ संख्या है। हालांकि, इस प्रदर्शन के बावजूद, पार्टी जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनने में विफल रही। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC)-कांग्रेस गठबंधन ने 49 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया और सरकार बनाने के करीब पहुंच गए।


 

 धारा 370 की समाप्ति और चुनावी उम्मीदें : 

5 अगस्त 2019 को धारा 370 की समाप्ति के बाद, भाजपा ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो जम्मू-कश्मीर को भारत के बाकी हिस्सों के साथ एकीकृत करने और विकास के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा गया। भाजपा ने इस फैसले के बाद उम्मीद की थी कि राज्य में उसका राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा, खासकर जम्मू और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में जहां पार्टी का मजबूत समर्थन है। जम्मू में भाजपा की जीत के आंकड़े इसे कुछ हद तक सही साबित करते हैं, लेकिन कश्मीर घाटी में यह रणनीति कम प्रभावी रही |

कश्मीर घाटी में अस्वीकार्यता:

हाल के चुनाव परिणामों में, कश्मीर घाटी ने भाजपा के खिलाफ भारी वोटिंग की। पार्टी का समर्थन घाटी में न्यूनतम स्तर पर रहा, जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) जैसी क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा बना रहा। भाजपा ने कुल 90 सीटों में से 29 सीटें जीतीं, जो एक महत्वपूर्ण संख्या है, लेकिन कश्मीर घाटी में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा। घाटी के कई हिस्सों में भाजपा विरोधी भावनाएँ अधिक रहीं, जहां स्थानीय मुद्दे और धारा 370 की बहाली की मांग अब भी केंद्र में हैं।

जम्मू क्षेत्र में मजबूत पकड़:

भाजपा का सबसे बड़ा समर्थन जम्मू क्षेत्र से आया, जहां पार्टी ने 24 में से 22 सीटों पर जीत हासिल की।
यह इस बात का प्रमाण है कि जम्मू के लोग भाजपा की धारा 370 हटाने की नीति का समर्थन करते हैं, साथ ही भाजपा द्वारा किए गए विकास कार्यों को भी मान्यता मिली है। जम्मू क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन पार्टी के लिए संतोषजनक रहा, और इसने कांग्रेस को यहाँ लगभग समाप्त कर दिया, जिसे भाजपा नेता ने "कांग्रेस-मुक्त जम्मू" कहा।

 स्थानीय मुद्दे और केंद्र-राज्य संबंध:

कश्मीर में चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय मुद्दों का प्रभाव अभी भी बहुत अधिक है। कश्मीर घाटी के मतदाताओं ने भाजपा की नीतियों को अस्वीकार किया, जो विकास पर केंद्रित थीं, लेकिन स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य में उन्हें व्यापक समर्थन नहीं मिला। धारा 370 की समाप्ति ने घाटी में असंतोष बढ़ाया है, और राज्यहुड की बहाली की मांग अब भी जोर पकड़ रही है

भविष्य की चुनौतियाँ:

इन चुनाव परिणामों से यह साफ है कि भाजपा के लिए जम्मू और कश्मीर में अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियों की आवश्यकता होगी। जहाँ जम्मू क्षेत्र में उसका समर्थन मजबूत है, वहीं कश्मीर घाटी में उसे अपनी नीतियों और रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। भाजपा को अगर घाटी में अपनी पकड़ बनानी है, तो उसे क्षेत्रीय आकांक्षाओं और स्थानीय मुद्दों को अधिक संवेदनशीलता के साथ समझना होगा |

धारा 370 हटाने के बाद भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में व्यापक बदलाव की उम्मीद की थी, परंतु चुनाव परिणामों ने दिखाया कि जम्मू क्षेत्र में पार्टी ने मजबूत पकड़ बनाए रखी है, जबकि कश्मीर घाटी में उसे स्वीकार्यता नहीं मिली। इस प्रदर्शन से पार्टी के सामने यह स्पष्ट होता है कि उसे कश्मीर में एक नई राजनीतिक रणनीति की आवश्यकता होगी, जो स्थानीय जनता की आकांक्षाओं को समझे और उन्हें संतुष्ट करे।

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