बिहार के सारण और सिवान जिलों में 16-17 अक्टूबर 2024 को जहरीली शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो गई। सिवान जिले में 17 और सारण में 8 लोगों की जान गई। राज्य सरकार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं और इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, साथ ही मृतकों के परिवारों को सहायता प्रदान करने का वादा किया है।
बिहार के सारण और सिवान जिलों में हाल ही में जहरीली शराब के सेवन से 25 लोगों की मौत हुई है। यह घटना राज्य की शराबबंदी नीति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मृतकों के परिजनों का कहना है कि यह त्रासदी प्रशासन की नाकामी का परिणाम है, क्योंकि शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार रुक नहीं पाया है।
परिवारों का दर्द:
मृतकों के एक परिजन, राम किशोर ने रोते हुए कहा, "मेरे भाई की मौत का जिम्मेदार कौन है? सरकार ने शराबबंदी का दावा किया था, फिर ये जहरीली शराब कैसे पहुंची? हम न्याय चाहते हैं, ये केवल हमारे परिवार की नहीं, सैकड़ों परिवारों की समस्या है।" सारण जिले में पीड़ितों में से कुछ ने आरोप लगाया कि पुलिस और स्थानीय माफिया की मिलीभगत से यह कारोबार चल रहा है।
सरकार की नाकामी:
बिहार सरकार ने 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, लेकिन इसके बावजूद राज्य में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। हर साल जहरीली शराब से मौतों की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार संख्या बढ़ने से हड़कंप मच गया है। 2024 की इस घटना में अब तक 25 मौतें हो चुकी हैं, और कई लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। सवाल यह है कि शराबबंदी के बाद भी ऐसे बड़े पैमाने पर अवैध शराब कैसे बिक रही है?
पुलिस और माफियाओं की मिलीभगत:
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और शराब माफियाओं की सांठगांठ के चलते यह व्यापार खुलेआम चल रहा है। एक अन्य परिजन, मोहन लाल ने कहा, "सरकार शराबबंदी की बात करती है, लेकिन पुलिस की नजरों के सामने शराब बिकती है। शराब माफिया पूरी तरह से सक्रिय हैं और उनका प्रशासन से डर खत्म हो चुका है।"
सरकारी आंकड़े और जवाबदेही:
बिहार में शराबबंदी के बाद से अब तक कई बार जहरीली शराब से मौतें हुई हैं, लेकिन इसके खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। 2022 में ऐसी ही एक घटना में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई
थी। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन सालों में बिहार में करीब 500 से अधिक लोग जहरीली शराब का शिकार हो चुके हैं। राज्य सरकार की नीतियों की विफलता के कारण यह काला बाजार रोकने में असमर्थ रही है।
नीतीश कुमार का बयान:
घटना के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और प्रशासन को दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अवैध शराब के कारोबार को समाप्त करने के लिए और कड़े कदम उठाएगी। परंतु विपक्ष और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सिर्फ बैठकों और निर्देशों से कुछ नहीं होगा, जब तक कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।
इस घटना ने एक बार फिर बिहार की शराबबंदी नीति और उसकी क्रियान्वयन में खामियों को उजागर कर दिया है। जनता और मृतकों के परिजनों की एकमात्र मांग है—न्याय और इस अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई।
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